Monday 21 January 2019

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राम नाम संग्रह बैंक से लोगों को दिखाया मुक्ति का रास्ता

Sat, 12/22/2018 - 09:40
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जन प्रखर खबर। जीवन में मानव सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं होती है लेकिन पारिवारिक कर्तव्यों और जिम्मेदारियों की वजह से हर कोई ऐसा कर पाने में समर्थ नहीं होता है लेकिन पण्डित बाल कृष्ण पुरोहित ने अपने जीवन को मानव सेवा के लिए समर्पित कर राम नाम को जीवन का लक्ष्य बनाकर श्रीराम नाम धन (संग्रह) बैक, का अजमेर में निर्माण किया। जिसका लक्ष्य मानव को 84 लाख योनियों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष प्राप्ति की और अग्रसर करना रहा है।  जन प्रखर खबर से डॉक्टर मुकेश अग्रवाल ने पण्डित बाल कृष्ण पुरोहित से खास बातचीत की जिसके कुछ अंश 
 
आपने इस तरह के बैंक का ख्याल कैसे आया और निमार्ण कब किया?
मानव कल्याण की प्रेरणा से सन् 1984 में नाड़ीयाल में जाने का अवसर प्राप्त हुआ वहाँ पर सन्तराम मन्दिर में सन्त श्री जी से प्रेरणा प्राप्त हुई इन्हीं के दिये हुए उपदेश का आदेश मानकर यह शुभ कार्य प्रारम्भ हो सका है सन्त श्री मौन रहकर केवल राम नाम जय हो किया करते है। इस राम नाम-धन (संग्रह) बैंक की स्थापना 7 अप्रेल 1987 को रामनवमी के पावन दिवस को की गयी थी। इस अवसर पर सामुहिक रामचरित मानस के परायण पाठ के पुर्णाहति पर इस बैंक की स्थापना अजमेर में की गयी है। 
 
राम नाम महामंत्र परिक्रमा की शुरूआत कैसे हुई और अब तक किन-किन जगहों पर की जा चुकी है? 
उत्तर:- इस शुभ व पावन कार्य की प्रेरणा श्री रामसुख दास जी महाराज से प्राप्त हुई थी। एक बार उनसे मुलाकात का पावन अवसर प्राप्त हुआ तो उन्होने राम नाम की हस्तलिखित पुस्तिका के बारे में पुछा तो हमने बताया कि हम इन्हें गंगा जी में विसर्जित कर देंगे तो उन्होंने ऐसे करने से मना किया और इनको सुरक्षित रखकर लोगों को परिक्रमा का धार्मिक लाभ प्रदान करने का शुभ अवसर देने की इच्छा व्यक्त की। उनकी इच्छा को शिरोधार्य मानकर यह कार्य प्रारम्भ किया गया है। यह कार्य तो भगवान श्री राम के प्रेरणा से ही सम्भव हो सकता है। उन्हीं के आशीर्वाद से अब तक भारत वर्ष में अनेक स्थानों पर यह कार्यक्रम आयोजित किया जा चुका है। अहमदाबाद-1, झाँसी-2, उरई-1, श्रीनाथ-1, सलेमाबाद-1, ब्यावर में-2, अजमेर में-7बार, भीलवाड़ा  में- 2 बार, उदयपुर-2 बार, जयपुर में भी किया जा चुका है। 
 
जयपुर में राम नाम महामंत्र का आयोजन कितनी बार किया जा चुका है और इस बैंक में कितने संदस्य हैं? 
उत्तर:- इस बार यह परिक्रमा स्व. श्री प्रधुम्न कुमार देव गोस्वामी जी शताब्दी वर्ष 25 फरवरी 2018 क पावन अवसर पर हो रहा है। श्री गोविन्द देव मन्दिर प्रशासन, जयपुर के श्री अंजन कुमार गोस्वामी जी एवं श्री मानस गोस्वामी जी की प्रेरणा से हो रहा है। जयपुर में यह 5वीं बार, आयोजित की जा रही है। श्री अंजन कुमार गोस्वामी जी एवं मानस  गोस्वामी जी की हार्दिक इच्छा प्रत्येक वर्ष दिसम्बर माह में, जयपुर में करने की भी है। अभी तक लगभग 25,500 से भी सदस्य बन चुके है। और सदस्यों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसमें सभी आयु के स्त्री-पुरूष शामिल है। आप सभी का सदस्यता हेतु सादर स्वागत है। 
 
अजमेर में राम नाम बैंक कहां स्थित है और हस्तलिखित प्रतिलिपियों को किस तरह से सुरक्षित रखा जाता है?
उत्तर:- अभी फिलहाल सर्व सिद्धी विनायक मन्दिर, अजमेर में यह कार्यरत व स्थापित है। इस मन्दिर के नीचे 18 हाथी पर विलक्षण वैदिक स्वरूप का मन्दिर है। मन्दिर के पुजारी लक्ष्मणजी है।  राम नाम को जगत का सहारा है। राम नाम से तो बड़े-बड़े तर गये मुक्ति को प्राप्त हो गये है। आज तक इस राम नाम की संग्रह पुस्तिका को चुहों के द्वारा कोई नुकसान नहीं पहुँचाया गया है। और न ही डीमक ने कोई नुकसान पहुचाया है। इतने लम्बे समय तक एक स्थान पर रखे राम नाम संग्रह पुस्तिका को चुहो द्वारा कोई नुकसान नही पहुचाना राम नाम की महीमा है। जब की मन्दिर में काफी मात्रा में चुहे है। 
 
भविष्य के लिए आपकी भावी योजना क्या है और अब तक कितनी संख्या में राम नाम संग्रह किया जा चुका है। 
उश्रर:- अब तक 60 अरब से ज्यादा हस्तलिखित राम नाम संग्रह किया जा चुका है। जो विश्व में सबसे ज्यादा एक ही बैंक द्वारा स्थापित राम नाम संग्रह है।  यह तो राम दी निर्भर है। जैसे प्रभु श्री राम की इच्छा होगी फिर भी पुष्कर में मंत्र मन्दिर स्थापित का लक्ष्य है। 
 
राम नाम संग्रह में किस प्रकार से लोग आपको सहयोग करते है?
उत्तर:- इस कार्यक्रम के लिए जयपुर शहर के अनेक सहयोगकश्र्राओं का समर्थन और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है इसमें जयपुर के सुरेन्द्र पारिक व हमारी संस्था से जुड़े हुए अनेक कार्यकश्र्राओं का सहयोग मिलता रहा है। जिसकी वजह से जयपुर शहर में यह कार्यक्रम सफल हो पाया है। 
 
 
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Jan Prakhar

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